शुक्रवार, जुलाई 27, 2012

डॉ. अम्बेडकर का स्त्री विमर्श...


अपनी नई पुस्तक के लिए आप सभी का स्नेह चाहती हूं. कृपया इसे अपना स्नेह प्रदान करें...... 
 
पुस्तक का नाम - डॉ. अम्बेडकर का स्त्री विमर्श
लेखिका- डॉ.(सुश्री) शरद सिंह 
सहलेखक- गुलाब चंद

प्रकाशक – भारत बुक सेन्टर, 17, अशोक मार्ग, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)- 226001

Woman discourse of Dr Ambedkar 
written by Dr (Ms) Sharad Singh, 
Co-writer Mr Gulab Chand

Published by Bharat Book Centre, 17, Ashok Marg, Lucknow  (UP) -226001

इस पुस्तक का विवरण एवं भूमिका अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रही हूं....... 

Dr Ambedkar Ka Stri Vimarsh- Cover





पुस्तक के फ्लैप्स




पुस्तक की भूमिका










रविवार, जून 03, 2012

डॉ. शरद सिह ‘‘जौहरी सम्मान’’ से सम्मानित......

Dr Sharad Singh Honored by H'ble Governor of Madhya Pradesh Shri Ram Naresh Yadav

महाराजा छत्रसाल जयंती, दिनांक 24.05.2012 के अवसर पर अखिल भारतीय बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद् भोपाल (म.प्र.) द्वारा राजभवन में आयोजित गरिमामय बुन्देलत्रयी सम्मान समारोह में मध्यप्रदेश के राज्यपाल महामहिम श्री रामनरेश यादव द्वारा सुपरिचित कथाकार एवं उपन्यासकार लेखिका डॉ. (सुश्री) शरद सिंह को उनकी पुस्तक ‘पत्तों में क़ैद औरतें’ के लिए ‘जौहरी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। शरद सिंह की यह पुस्तक बुन्देलखण्ड के संदर्भ में जि़ला सागर (म.प्र.) की बीड़ी महिला श्रमिकों पर केन्द्रित है।
Dr Sharad Singh Honored by H'ble Governor of Madhya Pradesh Shri Ram Naresh Yadav

Dr Sharad Singh Honored by H'ble Governor of Madhya Pradesh Shri Ram Naresh Yadav
Nationlal Dunia, New Delhi, 29.05.2012
NavDunia, Bhopal 30.05.2012

Dr Sharad Singh Honored by H'ble Governor of Madhya Pradesh Shri Ram Naresh Yadav




गुरुवार, मई 17, 2012

शुक्रवार, मई 11, 2012

‘लमही’ में प्रकाशित मेरी कहानी ‘सोचा तो होता’





‘उसे अपनी वो बात याद आ गई जो उसने कभी अपनी मां सुखबाई को ताना मारते हुए कही थी।
        "अच्छा !! हमारे पीछे तो कोई नहीं आता है, तुम्हारे पीछे फुग्गन क्यों पड़ा था....?' बेटी आरती ने अपनी सच्चरित्रता तो स्थापित करते हुए सुखबाई पर कीचड़ उछाल दिया था ।
          अब यही बात क्या अपनी बेटी मुन्नी से कह सकती है ?’ .........(मेरी कहानी ‘सोचा तो होता’ से)

http://issuu.com/lamahipatrika/docs/lamahi_april_june_ank

- ‘लमही’ में  प्रकाशित मेरी कहानी ‘सोचा तो होता’ को इस लिंक पर पत्रिका के पृष्ठ 40 पर सुगमता से पढ़ा जा सकता है.




गुरुवार, मई 03, 2012

सोचा तो होता.....

‘लमही’ के अप्रैल-जून 2012 अंक में प्रकाशित मेरी कहानी


- डॉ. शरद सिंह







बड़ा कर के पढ़ने के लिए कृपया इमेज़ पर क्लिक करें -




मंगलवार, मई 01, 2012

लघुकथा - शुक्र है कि टौमी बच गया

शुक्र है कि टौमी बच गया ....(लघुकथा) 

- सुनील कुमार

चमचमाती कार बंगले  के अन्दर तेज़ गति से घुसी और अचानक ही ड्राइवर ने  ब्रेक लगा कर कार रोक दी क्योंकि कार के आगे साहेब का विदेशी कुत्ता टौमी आ गया था ।
ड्राइवर ने किसी तरह टौमी को बचा दिया । मगर इस हादसे में घर में काम करने वाली आया का चार साल के  बच्चे  को चोट आ गयी ।
साहेब ने जल्दी से कार से उतर कर आये और आया  को सौ रुपये दिए और कहा जाओ इसकी मलहम पट्टी करवा लो ।
थोड़ी देर बाद घर कें अंदर सबके चेहरे  खिले हुए थे और जुवान पर एक बात थी ।
भगवान का शुक्र है कि टौमी बच गया ...... 

(साभार प्रस्तुति- डॉ. शरद सिंह)