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गुरुवार, सितंबर 26, 2024

मेरी कहानी से - डॉ (सुश्री) शरद सिंह | From My Story 4 - Dr (Ms) Sharad Singh

मेरी कहानी से - डॉ (सुश्री) शरद सिंह
From My Story 4 - Dr (Ms) Sharad Singh
"हे पुरुरवा ! ... तुम पुरुष स्त्री के अतीत में क्यों जीना चाहते हो? स्त्री के अतीत को लेकर किस बात से भयभीत रहते हो? ... आज जो है उसे उस अतीत पर क्यों वारते हो जो न आज है और न भविष्य में कभी होगा। अतीत कभी न लौटने वाला समय होता है, उसके पीछे भागने से भला क्या लाभ?"
       मेरी कहानी "तुम कहां हो, पुरुरवा?" से - डॅा. (सुश्री) शरद सिंह
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मेरी कहानी से - डॉ (सुश्री) शरद सिंह | From My Story 3 - Dr (Ms) Sharad Singh

मेरी कहानी से - डॉ (सुश्री) शरद सिंह
From My Story 3 - Dr (Ms) Sharad Singh
 "अच्छा !! हमारे पीछे तो कोई नहीं आता है, तुम्हारे पीछे फुग्गन क्यों पड़ा था....?"
आरती ने अपनी सच्चरित्रता तो स्थापित करते हुए मां सुखबाई पर कीचड़ उछाल दिया था । अब यही बात क्या आरती अपनी बेटी मुन्नी से कह सकती है ?’ 
     मेरी कहानी "सोचा तो होता" से - डॅा. (सुश्री) शरद सिंह
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रविवार, सितंबर 08, 2024

मेरी कहानी से - डॉ (सुश्री) शरद सिंह | From My Story 1 - Dr (Ms) Sharad Singh

मेरी कहानी से - डॉ (सुश्री) शरद सिंह
From My Story 1 - Dr (Ms) Sharad Singh

"रसूखवालों का बैर और प्यार दोनों बराबर होते हैं, गले मिलो तो चाटेंगे, और झगड़ा करो तो बोटियां काटेंगे ! ऐसे ही चलने दो अभी तो, फिर देखते हैं कि आगे क्या होता है.... तुम सामने नहीं पड़ोगी तो चार दिन में ही किसी और दरवाज़े में झांकने लगेगा वो ।’"
     मेरी कहानी "चल चकवा वा देस को, जहां रैन नहिं होय" से - डॅा. (सुश्री) शरद सिंह

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