‘हंस’ पत्रिका के अप्रैल 2013 अंक में मेरी कहानी ‘लव एट फोर्टी प्लस’ प्रकाशित हुई है...
- डॉ. शरद सिंह
‘‘.........राजीव चला गया. सूनेपन ने मुझे घेर लिया. या यूं कहूं कि बुरी तरह जकड़ लिया. समझ में नहीं आता था कि क्या करूं? कैसे अपना मन बहलाऊं? राजीव के जाने से बहुत पहले....बल्कि शादी के बाद राजीव के साथ गृहस्थी संवारने के दौर में ही मैंने आईने में अपने शरीर को देखना-परखना छोड़ दिया था। इसकी आवश्यकता मुझे अनुभव ही नहीं हुई. मेरे पति को मेरी देह से कोई शिक़ायत नहीं थी फिर भला मैं उसे क्यों देखती. ...’’
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