- डॉ. शरद सिंह
साहित्य की किसी विधा की विशेषताओं को कुछ बिन्दुओं में प्रस्तुत करना अति संक्षेपीकरण माना जा सकता है तथापि मेरी दृष्टि में समकालीन हिन्दी कथा साहित्य की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नानुसार हैं-
1- पहले की अपेक्षा अधिक यथार्थवादी कथानक
2- सामाजिक सरोकारों के साथ राजनीतिक एवं आर्थिक मूल्यों की चर्चा
3-स्त्री विमर्श पर आधारित कथानक
4-अपने अस्तित्व के लिए जूझती हुई, दोयम दर्जे से ऊपर उठती नायिका
5-दलित चेतना पर केन्द्रित कथावस्तु
6-स्त्रियों और दलितो की आन्तरिक पीड़ा का मुखर प्रस्तुतिकरण
7-फंतासी के बदले प्रेम का अधिक यथार्थ एवं व्यवहारिक वर्णन
8-भारतेन्दुयुग की कहानियों की तुलना में परिवर्तन के अधिक प्रभावी आग्रह
9-अलंकारिकता के आडम्बर से परे सरल, सहज, आम बोलचाल की भाषा
10-निरन्तर प्रयोगधर्मी शैली
11-स्थानीय शब्दों और मुहावरों का अधिक प्रयोग
12-आंचलिक परिवेश की कहानियां
13-प्रेमचन्द और यशपाल से शुरू हो कर निरन्तर विकसित होता कथा-शिल्प
14-जीवन के नित नवीन पक्षों को उजागर करती कहानियां