शुक्रवार, अक्टूबर 09, 2026

कहानी, तुम्हें भी मुक्तकेशी होना था, रूपाली!, डॉ (सुश्री) शरद सिंह, पहला अंतरा पत्रिका

भोपाल से प्रकाशित होने वाली बहुचर्चित पत्रिका "पहला अंतरा" जुलाई-सितंबर 2026 अंक में मेरी कहानी "तुम्हें भी मुक्तकेशी होना था, रूपाली" प्रकाशित हुई है। 
पत्रिका के संपादक नरेंद्र दीपक जी का हार्दिक आभार 🙏
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