गुरुवार, जनवरी 10, 2013

मधुरेश जी की दृष्टि में ‘कस्बाई सिमोन’ उपन्यास .....

(‘जनसत्ता’ के 06 जनवरी 2013 अंक में प्रकाशित समीक्षा )

2 टिप्‍पणियां:

  1. कई मार्ग स्वयं खुलने लगे हैं, नैतिकता अपना मर्म व्यापक अर्थों में समझ रही है। सुन्दर उपन्यास।

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  2. बहुत बहुत बधाई शरद जी इस सुंदर उपन्यास के लिये.

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