मंगलवार, फ़रवरी 08, 2011

गरीबों की मदद


14 टिप्‍पणियां:

  1. समय पालन भी कोई चीज़ है। चार गरीबों को कहाँ अधिकार कि करोड़ों के पालनहार को इस तरह देर करा दें। बड़ी सटीक कथा।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सटीक सार्थक लघुकथा...

    यही तो है...वचन और व्यवहार में एकरूपता ... कितने कर पाते हैं और नेता ???? इनसे तो यह आशा रखना ...हम सोच भी नहीं सकते...

    संक्षिप्त कलेवर में गंभीर सन्देश ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. धन्यवाद प्रवीण पाण्डेय जी, संवेदनशीलता का ग्राफ निरंतर गिरता ही जा रहा है, यह चिन्ता का विषय है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुशील बाकलीवाल जी, हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. रंजना जी, यह हमारा दुर्भाग्य है कि ऐसे ही असंवेदनशील लोग देश के भाग्यविधाता हैं।
    मेरे ब्लॉग पर फिर आने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. hamare neta
    bharat ke bhagya bidhata
    tasveer to roz dekhti thi
    aapne shavdon main bata diya..

    उत्तर देंहटाएं
  7. उदय पंधीर जी,
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है
    आभारी हूं विचारों से अवगत कराने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  8. कथनी और करनी का फर्क नज़र आ रहा है.
    सार्थक लघुकथा

    उत्तर देंहटाएं
  9. सटीक। समस्यायों के निराकरण का जिम्मा उन्होने झटक लिया है जिन्हें न तो समझ है और न सम्वेदना।

    उत्तर देंहटाएं
  10. सोमेश सक्सेना जी,
    अत्यन्त आभारी हूं आपकी.....
    विचारों से अवगत कराने के लिए.. हार्दिक धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  11. अनुराग शर्मा जी,(स्मार्ट इंडियन)
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया.
    हार्दिक धन्यवाद एवं आभार.
    कृपया इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

    उत्तर देंहटाएं